whey protein क्या है कैसे बनता है ?


व्हे प्रोटीन (WHEY PROTEIN) एक बहुत ही फेमस प्रोटीन सप्लीमेंट है, और जब भी जिम, वर्कआउट, बॉडी बिल्डिंग की बात आती है तो वे प्रोटीन बॉडी-बिल्डर्स और फिटनेस प्रेमियों की पहली पसंद बनती है | प्रोटीन एक अच्छा सप्लीमेंट है जोकि मार्किट के अंदर बहोत सालो से चलते आ रहा और सबसेभरोसेमंद सप्लिमेन्ट है |बहोत सारी कम्पनिया अब मार्किट में व्हे प्रोटीन नाम पर प्रतिरूप(डुब्लीकेसी) सप्लीमेंट बेच रहे है |




व्हे प्रोटीन क्या है ?

व्हे प्रोटीन(WHEY PROTEIN) एक हाई क्वालिटी प्रोटीन है | यह प्रोटीन 100% नेचुरल हैऔर वेजीटेरियन प्रोटीन भी क्योंकि यह मिल्क से बनता है|  व्हे प्रोटीन मिल्क से मिलने वाले प्रोटीन लगभग 20% होता है |

ज्यादातर व्हे प्रोटीन कंप्लीट प्रोटीन है और इसमें सभी प्रकार के एसेंशियल अमीनो  एसिड मौजूद होते है | व्हे प्रोटीन ब्रांच चयन अमीनो एसिड इसके बेस्ट सोर्स मैं से एक है जिसमें ल्युसीन भी होता है जो मसल सिंथेसिस एंड मसल ग्रोथ के लिए बेहतरीन माना जाता है और वे प्रोटीन आसानी से डाइजेस्ट भी हो जाता है | ALSO READ

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क्या व्हे प्रोटीन लेना सैफ है ?

बहुत सारे लोगों के दिमाग में यह बात होती है कि क्या व्हे प्रोटीन हमारे लिए सेब हो सकता है ? या फिर वह लेने से कुछ हमें साइड इफेक्ट हो जाएगा ? हमारे कम्युनिटी में ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो व प्रोटीन के अलावा दूसरे सप्लीमेंट का यूज़ करते हैं जैसे कि मास गेनर, वेट गेनर आदि सारे, और जब वह लोग कुछ दिन बाद इस्तेमाल करने के बाद रिजल्ट देखते हैं तो उनका वेट बढ़ा हुआ होता है और साइज भी और शरीर पर पिम्पल्स आ जाते है |

लोग प्रोटीन सप्लीमेंट को गलत समझ बैठे बल्कि उनका सप्लीमेंट जो होता है वही असलियत में खराब होता है और वहां नाम बदनाम होता है सप्लीमेंट का जैसे की व्हे प्रोटीन |


जो लोग व्हे प्रोटीन इस्तेमाल करते हैं अच्छी कंपनी का तो हां बिल्कुल सेफ है, क्योंकि यह गाय के दूध से बना हुआ होता है कुछ लोगों को पता नहीं होता कि वह प्रोटीन क्या है इसलिए वह हमें गलत समझते हैं कि तुम सप्लीमेंट लेते हो और बॉडी बनाते हो |

असलियत में उनको पता नहीं होता कि सप्लीमेंट एक सिर्फ प्रोटीन कंप्लीट करने का जरिया (सोर्स) होता है, जिससे हम अपना दिन का डाइट पूरा नहीं कर सकते तो हम यह सप्लीमेंट के एक स्कूप से 25 से 30 ग्राम प्रोटीन सेवन (इन्टेक) पूरा कर सकते हैं| व्हे प्रोटीन पूरे वर्ल्ड में फेमस है| यदि आप एक्सरसाइज नहीं भी करते हो या जिम नहीं जाते हो तो भी आप भी प्रोटीन का इस्तेमाल कर सकते हो क्योंकि यह हमारे सेहत के लिए अच्छा होता है | इसलिए व्हे प्रोटीन बिल्कुल सैफ है | ALSO READ

व्हे प्रोटीन कैसे बनता है ?


व्हे प्रोटीन गाय के दूध में पाया जाता है इसलिए लगभग सभी व्हे प्रोटीन का श्रोत दुग्ध फॉर्म ही है। गाय के दूध में दो सबसे महत्वपूर्ण  प्रोटीन होते हैं, एक  कैसीन प्रोटीन है जो दूध में 80% तक होता  है। और  20 % में व्हे प्रोटीन पाया जाता हैं।
व्हे प्रोटीन का उत्पादन चीज़ बनाने की प्रक्रिया के दौरान होता है जिसकी शुरूआत कच्चे दूध में कुछ एंज़ाइम्स के मिलाने के बाद होती है। एंज़ाइम्स दूध में कई घटको को अलग कर देता है उनमें से ही एक दही का रूप धारण कर लेता है। इस वक्त जो दही बनी है इसी का उपयोग चीज़ बनाने में किया जाता है |और चीज़ बनाने की प्रक्रिया के दौरान ही व्हे प्रोटीन तरल पदार्थ के रूप में निकलता है। 
और बाद में तरल पदार्थ रूप में यह व्हे प्रोटीन क्रीम में होता है और उसे सुखा कर पॉऊडर के रूप में बनाया जाता है |जिसका प्रयोग बॉडी-बिल्डर्स,स्पोर्ट के खिलाडी,फिटनेस मॉडल,एक्टर इसका सेवन करने के लिए किया जाता है। 

प्रोटीन सप्लीमेंट का इस्तेमाल कैसे करे ?


बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनको प्रोटीन सप्लीमेंट का इस्तेमाल कैसा करना है नहीं पता होता | जिम जाते हैं,मेहनत करते हैं और जब  वर्कआउट खत्म होने के बाद सप्लीमेंट की बारी आती है तो वे लोग सप्लीमेंट का इस्तेमाल दूध में मिलाकर लेते हैं जो कि दूध में फैट होने की वजह से वह हमारी डाइजेशन धीरे कर देता है और हमारे मसल्स को जो तुरंत रिकवरी होनी चाहिए वह नहीं मिल पाती इसके वजह से हमें जो रिजल्ट मिलना चाहिए  वह नहीं मिल पाता और हम सप्लीमेंट को दोष देते हैं |

यदि आप सप्लीमेंट का यूज करना चाहते हैं तो आप जो आप यूज़ करना चाहते हो वह ब्रांड वह प्रोटीन उसमें कितनी मात्रा में प्रोटीन मौजूद है और उसे कैसे इस्तेमाल करना चाहिए और कब इस्तेमाल करना चाहिए दिन में कितनी बार इस्तेमाल करना चाहिए और  वर्कआउट से पहले या फिर वर्कआउट के बाद कैसे इस्तेमाल करते हैं यह जरूर एक बार पढ़ ले या फिर वीडियो देख ले | ALSO SEE

अगर आप वर्कआउट के बाद प्रोटीन सप्लीमेंट यूज कर रहे हैं तो आप उसका इस्तेमाल पानी में  मिलाकर ही करें क्योंकि पानी में किसी भी तरह का फैट शुगर नहीं होता और वह हमारी बॉडी में जल्दी से डाइजेस्ट हो जाता है यदि आप प्रोटीन का इस्तेमाल पानी में करते हैं  तो वह जल्दी आपके शरीर में डाइजेस्ट होगा और आपकी मसल्स रिकवरी भी अच्छी होगी और आपके बॉडी मैं भी अच्छे बदलाव नजर आएंगे |

यदि आप सप्लीमेंट पानी में ले रहे हो या दूध में ले रहे हो तो यह प्रयोग जरुर करके देखें |


एक महीना प्रोटीन सप्लीमेंट दूध में मिलाकर वर्कआउट के बाद में ले तो आपको जो रिजल्ट आएगा वह कैलकुलेट करें और अगले  महीने में प्रोटीन सप्लीमेंट का इस्तेमाल ठीक वैसे ही वर्कआउट के बाद करें जो कि आपने पिछले महीने किया था, लेकिन आप दूध की जगह पानी का इस्तेमाल करें और उसका रिजल्ट देखें आप खुद ही समझ जाओगे की पानी में लेने से सप्लीमेंट का महत्व दूध में लेने से बेहतर है|  

यदि आप आज भी सप्लीमेंट दूध में ले रहे हो या फिर आपको आपके जिम के कोच ने 1 महीने में वजन बढाने का वादा किया है ,तो फिर वह आपको दूध में ही देने के लिए कहेंगे लेकिन आप मसल नहीं गेन कर पाओगे आप अपने बॉडी में फैट ही गेन करोगे | जो कि आप फैट जिम बंद करने के बाद या फिर सप्लीमेंट बंद करने के बाद निकल जाएगा लेकिन आप फैट की जगह मसल गेन करेंगे तो आपकी बॉडी हमेशा वैसे ही रहेगी |इसलिए आपको पानी में ही सप्लीमेंट  का इस्तेमाल करना बेहतर होगा |

यदि आपको अपनी बॉडी ज्यादा समय तक टिके रहे ऐसा करना है तो अपनी न्यूट्रिशन, डाइट और एक्सरसाइज पर ध्यान दें |
व्हे प्रोटीन के कितने प्रकार हैं?

  • व्हे कॉन्सन्ट्रेट (Whey concentrate)
  • व्हे आईसोलेट (whey isolate)
  • व्हे हाइड्रोलाइज् (whey hydrolyzed)
 यह तीन प्रकार के व्हे प्रोटीन के प्रकार हैं |

1) व्हे कॉन्सन्ट्रेट (Whey concentrate):-

मार्केट के अंदर सबसे ज्यादा व्हे कॉन्सन्ट्रेट है, जिसकी कीमत सस्ती होगी उसके अंदर जो कार्ब्स ,फैट और शुगर ज्यादा होगी, क्योंकि जब वह प्रोसेस करते हैं तो उसकी कीमत कम आएगी जब बनता है तो वह ज्यादा दोबारा अच्छी तरह से प्रोसेस नहीं करते अगर वह दुबारा प्रोसेस करें कॉन्सन्ट्रेट को तो आईसोलेट बनता है |

2) व्हे आईसोलेट (whey isolate):-

व्हे आईसोलेट प्रोटीन मतलब उसके अंदर जो कार्ब्स ,फैट और शुगर है तो वह कम हो जाएंगे | आइसोलेट में और उसकी कीमत जो है डेढ़ गुना ज्यादा हो जाएगी | मतलब अगर व्हे कॉन्ट्रैक्ट का रेट मार्केट के अंदर 2000/- RS. है तुम्हें आइसोलेट का कीमत 3000/-RS. होगी |


3) व्हे हाइड्रोलाइज् (whey hydrolyze):-

व्हे हाइड्रोलाइज् प्रोटीन मतलब आइसोलेट प्रोटीन
को दोबारा प्रोसेस करते हैं जो भी वह आइसोलेट प्रोटीन के अंदर बचा हुआ कार्ब्स ,फैट और शुगर निकाल देते हैं, तो उसे
हाइड्रोलिक के अंदर सिर्फ प्यूर प्रोटीन होता है उसके अंदर कार्ब्स ,फैट और शुगर नहीं होती है, जिसके कारण उसकी  
कीमत जो है वह व्हे कॉन्सन्ट्रेट के दो गुना हो जाएगी मतलब 4000/-RS.


यह तो एक सिर्फ उदाहरण था यह तो सब अलग-अलग ब्रांड के प्रोटीन पर डिपेंड करता है | व्हे हाइड्रोलाइज् प्रोटीन  की कीमत इतनी ज्यादा है क्योंकि उसमें प्यूर प्रोटीन होता है | और व्हे हाइड्रोलाइज् लेक्टोज़ फ्री होता है |

इसमें लेक्टोज़ नहीं होता | लेक्टोज़ का मतलब है मिल्क शुगर, जो दूध के अंदर शुगर होती हैं उसे लैक्टोज  कहते हैं यहां हाई क्वालिटी प्रोटीन है व्हे प्रोटीन हाइड्रोलाइज् यह मार्केट के अंदर सब से कम बिकता है, क्योंकि इसकी कीमत ज्यादा है | और इसको लेने वाले जो कैटेगरी होते हैं जो लोग कंपटीशन करते हैं, शो में और जो फिटनेस मॉडल है वह और जिन को लेक्टोज़ की प्रॉब्लम है |


आपको पता ही होगा जो व्यक्ति संपीटीशन  करता है वह कार्ब, फैट और शुगर को बिल्कुल अपने डाइट से दूर रखते हैं | तो यह कीमत में बहुत ही ज्यादा होता है, यदि आपको इस्तेमाल करना हो तो आप कुछ समय के लिए इस्तेमाल कर सकते हो | ALSO READ

स्वाद (TASTE):-


इसमें टेस्ट की बात की जाए तो व्हे हाइड्रोलाइज् की टेस्ट इतनी अच्छी नहीं है जितनी कि व्हे आईसोलेट क्योंकि उसमें से कार्बोहाइड्रेट, फैट और शुगर निकालने के बाद उसका स्वाद एक ना के बराबर जैसा होगा | मिलावट (मिक्स एबिलिटी) अच्छी होगी लेकिन टेस्ट एवरेज होगा | ALSO SEE


तो यह तीन प्रकार के प्रोटीन के प्रकार है| और भारतीय बाजार में  व्हे कॉन्सन्ट्रेट Whey concentrate का ज्यादा मांग है क्योंकि इसमें कम कीमत में अच्छा प्रोटीन मिलता है 65% प्रोटीन होता है | बाकी 35% आपको कार्बोहाइड्रेट, फैट,और शुगर मिल रहे हैं, जो कि आप कार्बोहाइड्रेट, शुगर के लिए पैसे दे रहे हो वह जरूरत नहीं है |

जब आप आइसोलेट व्हे प्रोटीन लेते हैं और हाइड्रोlised व्हे प्रोटीन लेते हैं तो आप ज्यादातर इसकी प्रोटीन परसेंटेज ज्यादा होते हैं |आइसोलेट के अंदर प्रोटीन  85% - 95 % प्रोटीन होगा बाकी फैट, कार्बोहाइड्रेट और शुगर होगी और व्हे हाइड्रोलाइज् के अंदर 99%-100% होगा और बाकी सामग्री जीरो होंगे |


यदि आप ज्यादा खर्च करते हो तो आप अच्छा प्रोटीन ले सकते हो |  लेकिन आइसोलेट प्रोटीन एक अच्छा प्रोटीन माना
जाता है जो कि बॉडी-बिल्डर्स, बिगिनर्स और फिटनेस मॉडल इनका ज्यादातर सेवन करते हैं क्योंकि इससे  बॉडी में स्पष्टता लाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं|


यदि आप प्रोटीन खरीदना चाहते हैं तो आइसोलेट प्रोटीन ही खरीदें अगर आप आइसोलेट प्रोटीन नहीं खरीद पाते तो कंसंट्रेट  प्रोटीन खरीदें अगर आप कंसंट्रेट नहीं खरीद पाते तो
कोई भी सप्लीमेंट का इस्तेमाल ना करें जैसे की ,कोई भी मास- गेनर, वेट-गेनर  और साइज गेनर इसके बजाय आप अंडो का सफ़ेद भाग (egg whites) का इस्तेमाल कर सकते हो |

प्रोटीन सोर्स के लिए वैकल्पिक (alternate) :-


अंडो का सफ़ेद भाग (Egg whites) को कोई भी सप्लीमेंट बदल नहीं सकता क्योंकि यह शुद्ध नैचरल आहार
(pure food ) होता है | मैं अंडो eggs ज्यादा सेवन करता हूं, और सप्लीमेंट की जगह जो आप लोग गलती कर रहे हैं
सप्लीमेंट पर पैसा लगाए जा रहे हैं पैसा खर्च करे जा रहे हैं | हर कोई सप्लीमेंट खरीद सकता है यह कोई ज्यादा महंगा नहीं
होता है | अगर आपको लगता है कि सप्लीमेंट खाने से बॉडी बन जाएगी तो यह बिल्कुल गलत बात है |

आप अपने नेचुरल फ़ूड पर ज्यादा फोकस करें क्योंकि यह हमारी बॉडी ड्यूरेबल (ज्यादा देर टिकने वाली ) बनाती है |आपकी बॉडी बनाना आपकी न्यूट्रीशन पर निर्भर होता है, नाही आपके सप्लीमेंट पर, सप्लीमेंट एक सिर्फ अपना डाइट पूरा करने के लिए एक सोर्स होता है | सप्लीमेंट से मसल नहीं बनते यहां सब न्यूट्रिशन का कमाल/ खेल होता है |

यदि आप अंडो का सफ़ेद भाग का (egg whites)  का सेवन ज्यादा से ज्यादा करेंगे तो इसका मुकाबला कोई भी सप्लीमेंट से नहीं होता | कोई भी सप्लीमेंट इसकी जगह नहीं ले सकता यदि आप के पास पैसा नहीं है या फिर आप पैसा सप्लीमेंट में खर्च नहीं करना चाहते हैं तो आप egg whites यह बहुत ही बेस्ट प्रोटीन है|

आपको पता ही होगा मार्केट में सबसे सस्ता और अच्छा प्रोटीन उपलब्ध है |अगर बात करें vs सप्लीमेंट के, तो आप ज्यादा से ज्यादा अच्छे न्यूट्रीशन ले और अपने मसल्स को ज्यादा रिकवरी टाइम दें और एक्सरसाइज  हर रोज करें | आपकी बॉडी में कुछ दिन बाद बहुत अच्छे बदलाव आ सकते हैं |ALSO READ
                            


फैक सप्लीमेंट कैसे पहचाने :





आजकल फेक सप्लीमेंट मार्केट में बहुत सारे अवेलेबल है क्योंकि हम उसे पहचान नहीं सकते आसानी से कंपनियों ने इतने सारे डुप्लीकेसी बना दी है मार्केट में अपने सप्लीमेंट कैसे ज्यादा से ज्यादा सेल हो सके और ज्यादा से ज्यादा कैसे पैसे कमाए जा सकते हैं |


फैक सप्लीमेंट या डुप्लीकेट सप्लीमेंट वही कंपनियों का होता है जो कंपनी का प्रोडक्ट ज्यादा से ज्यादा मार्केट में सेल होता है ऐसे ही एक व्हे प्रोटीन नामक सप्लीमेंट इंडिया में मौजूद है |


जो लोग पहली बार सप्लीमेंट खरीदते हैं वह लोग हमेशा फस जाते हैं, क्योंकि उनको पता नहीं होता कि ओरिजिनल सप्लीमेंट और फेक सप्लीमेंट में क्या फर्क होता है |

  • 1 ) सबसे पहले आप  प्रोटीन कंटेनर होता है उसका सील/ बैच लगा है या नहीं यह चेक कर ले|बाहर से भी और अंदर से भी देखले |
  • 2) और उस के निचले साइड में भी ब्रांड का सील या फिर कुछ लिखा हुआ लगा है या नहीं वह भी चेक कर ले
  • 3 ) ओरिजिनल सप्लीमेंट उस पर FSSAI  का बैच लगा हुआ होता है |
  • 4) स्वाद की बात करे तो सप्लीमेंट का टेस्ट यदि अच्छा ना लगे या फिर उसमें एक अलग ही टेस्ट लगे तो उसे यूज ना करें वह फेक सप्लीमेंट होता है| सप्लीमेंट में कभी कबार टेस्ट लाने के लिए उसमें ज्यादा शुगर की मिलावट होती है और उसकी टेस्ट बढ़ाई जाती है ताकि लोगों को समझ ना आए कि यह डुप्लीकेट है | और हम यहां ही कन्फ्यूज होते हैं |
  • 5) फैक पानी में अच्छी तरह से नहीं घुल पाता जितना की ओरिजिनल होता है | यानि के उसकी मैक्सिबिलिटी अच्छी नहीं होती और पचने में भी बॉडी में भरा हुआ लगता है |
  • 6) सप्लीमेंट के कंटेनर पर जो बारकोड लगा हुआ होता है उसको अपने मोबाइल में बारकोड ऐप डाउनलोड करके वह बारकोड को सर्च करके देखें यदि सर्च में कुछ रिजल्ट दिखाता है तो वह ओरिजिनल है और ERROR या फिर कुछ भी न दिखाएं तो वह फेक सप्लीमेंट होता है|
  • 7) जब सप्लीमेंट में जब बारकोड सर्च किया जाता है तो उस पर वह कंपनी का नाम, एड्रेस और उनका फोन नंबर सर्च होता है ,और यदि आपको कुछ प्रॉब्लम होगा तो हम उस कंपनी को कांटेक्ट कर सकें |
  • 8) फैक् सप्लीमेंट की कीमत ओरिजिनल सप्लीमेंट के आधे कीमत में बेचा जाता है, और यदि कोई भी व्यक्ति आपको ओरिजिनल सप्लीमेंट दो या तीन हजार में देने का वादा करता है तो समझ लेना वह फेक सप्लीमेंट हो सकता है |
  • 9)सप्लीमेंट के कंटेनर पर जो इंफॉर्मेशन दी गई होती है उसे अच्छे से पढ़े और यदि वहां पर कुछ गलत लिखा हो तू भी आप अंदाजा लगा सकते हो कि यह फेक सप्लीमेंट है क्योंकि अच्छी कंपनियां स्पेलिंग मिस्टेक नहीं करती और यदि स्पेलिंग मिस्टेक हो ही जाती है तो वह सप्लीमेंट मार्केट में नहीं भेजती|


whey protein क्या है कैसे बनता है ? whey protein क्या है कैसे बनता है ? Reviewed by jitt fitness on June 11, 2018 Rating: 5
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